माँँगता है लक्ष्य जो बलिदान क्या दे सकोगे ?
Originally written on 12 June 2020 at 11:10 PM माँगता है लक्ष्य जो बलिदान क्या दे सकोगे ? हर वक्त ये ख्याल हो कि क्या महान बन सकोगे ? रूक न जाना ऐ राही राह में मुश्किल बहुत हैं, मिलने वाले हर पथिक के साथ क्या चल सकोगे ? एक बार मिली है जिंदगी क्या मिसाल बन सकोगे ? निश्चित समय है तेरे पास क्या उपयोग कर सकोगे ? गुजर रहे हर पल का हिसाब क्या रख सकोगे ? खो न जाएं तेरे सपने इस भीड़ की आगोश में, हर हार के बाद फिर क्या उठ सकोगे ? मंजिल उन्हीं को मिलती है जो रुकते नहीं हैं राहों में, सब कुछ सहते हुए क्या पथ पर चल सकोगे ? रास्ते में चुभने वाले काटों का दर्द क्या सह सकोगे ? साथ हो न हो कोई तेरे क्या अकेले चल सकोगे ? माँगता है लक्ष्य जो बलिदान क्या दे सकोगे ? गर हाँ है तो बढ़ते रहो यूं ही अग्रसर, मंजिल इंतजार कर रही है उसी पथ पर... ~ अमन श्रीवास्तव @sriv_aman